मार्दव धर्म हमे झुकना, विनम्र और घमंड रहित होना सिखाता है- आचार्यश्री

Aug 29 2025

ग्वालियर। जैन धर्म में मार्दव धर्म हमे झुकना, विनम्र और घमंड रहित होना सिखाता है। व्यक्ति जितना विनम्र होता चला जाता है, वह व्यक्ति उतना ही परमात्मा के निकट पहुंचता जाता है। अहंकार जीवन में बड़ा बाधक है। अपने जीवन से अहंकार को त्याग कर विनय भाव धारण करें। विनय के बिना परमात्मा को नहीं पाया जा सकता। अंहकार पाप का दाता हैं, दुख हैं संताप हैं। मृदुता को पाने के लिए मनुष्य जन्म लेना होता है। इस भौतिकवादी संसार में प्रत्येक व्यक्ति अपने को बड़ा समझता है और दूसरे को छोटा समझता है। यह जीवन आपको नीच गति में ले जाने का काम करता है इसलिए व्यक्ति अपने जीवन को संयमी बनाने का कष्ट करें। आपका तभी कल्याण होगा। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने ने नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला ने पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को उत्तम मार्दव धर्म पर दसलक्षण महामंडल विधान मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि पर्यूषण पर्व दूसरे दिन उत्तम मार्दव पर आचार्यश्री ओर विधानाचार्य राजमल जैन के मार्ग दर्शन में शिवार्थियो ने जल से भरे कलशों से जयकारों के साथ भगवान महावीर स्वामी का भक्तिभाव के साथ अभिषेक किया। वही आचार्यश्री ने मंत्रो से बृहद शांतिधार की।