क्षमा धर्म विश्व शांति का प्रबल मंत्र है-आचार्यश्री

Aug 28 2025

ग्वालियर। उत्तम क्षमा धर्म के पालन का संकल्प लेने के साथ गुरुवार को जैन धर्मावलंबियों का पर्यूषण महापर्व का आगाज हुआ। गुरुवार सुबह से ही नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य में आध्यात्मिक श्रावक साधना शिविर के शिवार्थियो ने प्रथम दिन भगवान जिनेंद्र का अभिषेक ओर शांतिधारा के साथ उत्तम क्षमा धर्म की पूजन में महाअर्घ्य समर्पित करे।
आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि क्षमा धर्म विश्व शांति का प्रबल मंत्र है। क्रोध जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है। अपने जीवन में क्रोध का प्रवेश मत करने दो। क्रोध न करना ही क्षमा का दूसरा नाम है। क्षमा मांगने की नहीं स्वयं के अंदर उतारने की आवश्यकता है। जैसे रूप का आभूषण गुण है और गुण का आभूषण ज्ञान है। उसी तरह ज्ञान का आभूषण क्षमा है। क्षमा से विश्वव्यापी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि सन्मति सुबल वर्षायोग समिति और सकल जैन समाज के तत्वावधान में आचार्यश्री सुबल सागर और मुनिराजों के सानिध्य में पर्यूषण पर्व के दशलक्षण पर्व के पहले दिन को उत्तम क्षमा धर्म के रूप में आत्मसात किया गया। व्रत रखकर जैन धर्मावलंबियों ने आराधना की। आचार्यश्री ओर विधानाचार्य राजमल जैन की मौजूदगी में शिवार्थियो ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान जिनेंद्र का जयकारों के साथ कलशों से अभिषेक किया गया। वही शाम को श्रीजी की दीपकों से आरती के बाद रात्रि में जैन महिला परिषद ग्वालियर के संयोजन में बूझो तो जाने प्रतियोगिता कराई गई।