भवसागर के दल-दल से निकालने आ रहे है पर्युषण पर्व-आचार्यश्री
Aug 25 2025
ग्वालियर। सभी धर्मों में पर्व, तीर्थ, शास्त्र, और मंत्र का समावेश किया गया है। पर्युषण पर्व हमारी आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाने आए हैं। यूं समझो ये पर्युषण महापर्व भवसागर के दल-दल से निकालने के लिए आ रहे हैं। हम सभी को इस पर्युषण पर्व का स्वागत प्परमात्मा पूजन, जिनवाणी श्रवण श्राविकाओं की तपस्या, प्रतिक्रमण जैसे धर्म उपक्रम से करना चाहिए। व्यक्ति को धर्म मात्र पर्यूषण पर्व पर ही नहीं बल्कि 365 दिन करना चाहिए। धर्म आत्मा का स्वभाव है, धर्म के बिना लोक, परलोक दोनों ही बिगड़ जाते हैं। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने सोमवार को नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि पर्यूषण महापर्व खुद के कल्याण करने की साधना का पर्व है।आठ दिनों की यह साधना जीवन की सबसे बड़ी साधना है। क्योंकि, मोक्ष मार्ग के लिए काम, क्रोध, लोभ, मोह और माया छोडक़र तप आराधना करनी होगी। इसलिए शरीर का मोह नहीं, बल्कि आत्मा का मोह रखो। पर्युषण पर्व दस धर्मों के नाम के साथ उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव से आत्मभाव का परिचय पाकर हम इन्हें प्राप्त करें और उत्तम शौच, सत्य, संयम, तप एवं त्याग को अपनाने के लिए तैयार हों, तभी क्रोध, मान, माया के अभाव से हम क्षमा, मृदुता व सरलता का अनुभव कर सकते हैं। क्षमा की अनुभूति होने पर ही धर्म का सार यानि आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य उपलब्ध होगा।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में ओर सन्मति सुबल मंगल वर्षायोग समिति के तत्वाधान में चंपाबाग धर्मशाला में जैन धर्म का सबसे बड़ा पर्व पर्यूषण महापर्व 28 अगस्त से 6 सितंबर तक आयोजित होगा। जिसमे आचार्यश्री के सानिध्य में आध्यात्मिक श्रावक साधना शिविर आयोजित किया जाएगा।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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