ज्ञानोदय विद्यालय के छात्रों ने गेट पर ताला लगाकर धरना प्रदर्शन किया

Aug 22 2025

ग्वालियर। शासकीय ज्ञानोदय आवासीय स्कूल में शुक्रवार को अव्यवस्थाओं के खिलाफ विद्यार्थियों ने स्कूल के गेट पर ताला लगाकर धरना-प्रदर्शन किया है। मामला हुरावली स्थित संभाग स्तरीय शासकीय ज्ञानोदय आवासीय स्कूल का है। स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्हें जो खाना दिया जा रहा है, उसमें मिलते हैं। पीने का पानी गंदा है। छात्रावास का भवन जर्जर हो चुका है। प्रभारी प्राचार्य और छात्रावास अधीक्षक तानाशाही करते हैं।
छात्रों ने 3 घंटे स्कूल में प्रदर्शन कर प्राचार्य व छात्रावास अधीक्षक को हटाने की मांग की है। जब सुनवाई नहीं हुई छात्र कलेक्ट्रेट के लिए निकल पड़े। सूचना मिलते ही सिरोल चौराहा पर ही पुलिस ने छात्रों को रोक लिया। यहां एसडीएम अतुल सोलंकी ने पहुंचकर छात्रों से बात की और मांगों पर अमल के लिए आश्वासन दिया।
इस बीच सूचना मिली कि सुनीता तोमर ने प्रभारी प्राचार्य के पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद छात्रों का गुस्सा कम हुआ है और वे छात्रावास लौट गए।
सिरोल-हुरावली पर शासकीय संभागीय ज्ञानोदय विद्यालय एवं छात्रावास में शुक्रवार सुबह से ही हंगामा होता रहा। विद्यालय के छात्रों ने गेट पर ताला लगाकर स्कूल के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों का आरोप है कि भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है। खाने में पत्थर और कीड़े तक मिलते हैं। छात्रावास की हालत जर्जर है। कमरे गंदगी से भरे हैं। साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं हैं।
पेयजल की सुविधा नहीं है। बच्चों ने बताया कि उन्हें गंदा पानी पीना पड़ता है। जिससे बच्चे बीमार हो रहे हैं। छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था नदारद है। चौकीदार शराब के नशे में नजर आते हैं। शिक्षकों की कमी है। कई विषयों की महीनों से कक्षाएं नहीं लग रही हैं। एक दिन बाद परीक्षा है और पांच दिन पहले शिक्षक पढ़ाने आए हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों से शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।
बच्चों ने कहा कि उन्हें गंदा खाना, गंदा पानी और असुरक्षित माहौल मिल रहा है। जिन बच्चों के हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए, वे गेट पर ताला लगाकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। भाजपा सरकार बताए कि ऐसे हालात में प्रदेश का भविष्य कौन सुरक्षित करेगा?
इधर कांग्रेस के प्रवक्ता धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है। ग्वालियर का ज्ञानोदय स्कूल इसका ताजा सबूत है।