जैसा आचरण आपका धर्म के प्रति है, वैसा ही आचरण लोगों के प्रति होना चाहिए-सुबल सागरजी

Aug 22 2025
ग्वालियर। हमें जीवन में सदैव अच्छा आचरण करना चाहिए। इसके साथ ही अच्छे विचार होने चाहिए एवं अच्छे प्रचारक बनाना चाहिए। जैसा आचरण आपका अपने धर्म के प्रति है, वैसा ही आचरण लोगों के प्रति होना चाहिए। धर्म क्रियाओं, अनुष्ठानों में आपके विचार अच्छे होने चाहिए। धर्म का बेहतर प्रचार करना चाहिए,ताकि सभी उसे ग्रहण कर सके। यह विचार आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ने नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि आचार के चुस्त और विचारों के दृढ़ बानो,अच्छा प्रचार करो, तभी आने वाली पीढ़ी को जिन शासन का पता चलेगा और वे भी अपने धर्म से जुड़े रहेंगे। जो अपने धर्म का नहीं हुआ वह दूसरे का नहीं हो सकता। आप आचार का पालन नहीं करेंगे तो अपनी पीढ़ी में क्या संस्कार डालेंगे। जैसा आप करेंगे वैसा ही आपकी आने वाली पीढी भी सीखकर करेगी। हमेशा धर्म के प्रति अच्छे विचार रखो। विचार के द्वारा जैन शासन को आगे बढ़ाओ। आज विचार में भी काफी गिरावट आई है। विचार से भी हम खत्म हो रहे हैं।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री सुबल सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास स्थल जिन सहस्त्रनाम विधान में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का कलशों से अभिषेक जैन समाज के लोगो ने जयकारों के साथ किया।
आचार्यश्री सुबल सागरजी महाराज ने कहा कि इस धरती पर जिस दिन से हमारा जन्म हुआ है हमने उपकार बहुत लिए। जन्म देकर माता-पिता ने,संस्कार देकर दादा दादी ने,स्नेह देकर स्वजनों ने हम पर उपकार किया है और ज्ञान देकर गुरुजनों ने और ना जाने कितने उपकार हम लेते हैं। इन सारे उपकारों के श्रृंखला में सबसे बड़ा उपकार हम पर जैन कुल का है। जैन कुल का उपकार है कि आपका जन्म जिनशासन में जन्म हुआ है। जैन शासन ने आपको संस्कार दिया,तीर्थ दिया,करोड़ो अरबों की संपत्ति जन्म लेते ही प्राप्त हुई। हमारे जीवन में परम उपकार परमात्मा के संस्कार शासन का होता है। सज्जन व्यक्ति वह होते हैं जो अपनी स्थिति ठीक होने पर उपकार चुकाते हैं।
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