कथावाचक भागवत के नाम पर जनता को अश्लीलता परोस रहे: डॉ स्वामी रघुनाथानंद

Aug 07 2025

ग्वालियर। श्रावण मास वर्षा ऋतु में फसलों का उत्पादन होता है और जितनी भी जड़ी बूटियां है वह वर्ष के कारण से उद्बोध होती हैं और इसमें जो भगवान शिव है उन्हें आठ मूर्तियों मेंढ समझना चाहिए पृथ्वी जल तेज वायु आकाश क्षेत्र ज्ञान सूर्य चंद्रमा है उक्त बात सिरोल रोड पर श्रीशिव महापुराण कर रहे कथावाचक वाचस्पति डॉ स्वामी रघुनाथानंद महाराज ने एक पत्रकार वार्ता में कहीं उन्होंने एक प्रश्न के जवाब में कहा की वेद शास्त्रों में ऐसी ऐसी विधियां है उपाय हैं आते हुए अपने शत्रुओं की धारा को रोक सकते हैं उन्हें हम लोग नहीं जानते वहीं उन्होंने भारत में गाय की दुर्दशा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा की आदिकाल से गोवंश को माता के रूप में पूजा जाता है लेकिन वर्तमान में गौ वंश दुर्दशा का शिकार हो रहा है जबकि सभी जानते हैं की गौ माता का मूत्र से लेकर गोबर तक मनुष्य के जीवन भर काम आता है इसीलिए भारत की भी दुर्दशा हो रही है वहीं उन्होंने शंकराचार्य के बारे में कहा की शंकराचार्य केवल अपनी कुर्सी की रक्षा कर रहे हैं यदि वह सनातन धर्म के लिए खड़े हो जाएं तो भारत के अंदर सनातन धर्म की जड़े मजबूत होगी उन्होंने भागवत कथाचार्यों के बारे में बताते हुए कहा की कथा वाचक भागवत में भगवान को दही चोर मटकी फोड़ गोपियों के वस्त्र चोर आदि कहते हैं जबकि भगवान धर्म की रक्षा के लिए अवतरित हुए भगवान कहते हैं मैं धर्म की रक्षा के लिए आता हूं और उन्हें कथावाचक व्यभचारी कहते हैं प्राय नारियों के साथ नाचने वाला नारियों के वस्त्र चुराने वाला ऐसा प्रस्तुत किया जा रहा है कथा बाज कौन है हमारे प्रभु योगेश्वर श्री कृष्ण के चरित्र को नहीं समझा और ना समझ के जनता के बीच में अश्लीलता परोस रहे हैं जिससे लोग सनातन धर्म पर आक्षेप उठाते हैं लिव इन में रहने वालों के सवाल पर उन्होंने कहा है की प्रभु ने मिट्टी बन कर दे दी है उसे जिस रूप में डालोगे वह उसी में ढलेगी इन सबके लिए शिक्षक जिम्मेदार हैं चाहे वह माता-पिता हो परिवार हो या शिक्षा देने वाला शिक्षक उन्होंने हाल ही सीहोर स्थित कुंबरेश्वर धाम में घटित घटना के लिए आयोजकों को जिम्मेदार ठहराया है उन्होंने कहा कि आयोजकों में सामर्थ है नहीं इसलिए इस प्रकार के हादसे होते हैं।