दो अप्रैल को हुए दंगे की बरर्सी पर पुलिस ने दिखाई ताकत
Apr 02 2025
ग्वालियर। एट्रोसिटी एक्ट को लेकर सात साल पहले 2 अप्रैल 2018 को ग्वालियर में भडक़ी जातिगत हिंसा में अंचल के तीन लोगों की मौत के साथ ही एक सैकड़ा से ज्यादा लोग घायल हुए थे। पहली बार ग्वालियर में 9 दिन कफ्र्यू लगा था और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थीं। उसी उपद्रव की सातवीं बरसी पर बुधवार को पुलिस अलर्ट मोड पर दिखाई दी।
दो अप्रैल को हुए दंगे की बरर्सी पर किसी तरह की परेशानी और स्थिति ना बिगड़े इसके लिए बुधवार तडक़े से ही पुलिस अफसर और जवान अलर्ट थे। जिन इलाकों में दंगे हुए थे वहां लोगों में किसी प्रकार का कोई भय न हो और स्थिति सामान्य रहे इसलिए वहां पुलिस को तैनात किया गया था। इसके अलावा अन्य संवेदनशील इलाकों में पुलिस की नजर रही।
एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि दो अप्रैल को हुए दंगों की - सातवीं बरसी पर लोगों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो इसके लिए सुबह से ही पुलिस जवान और अफसर तैनात किए गए थे। वहीं अन्य संवेदनशील इलाकों में भी पुलिस का पहरा लगाया गया था, जिससे शहरवासी भय मुक्त रहें।
दो अप्रैल 2018 को हुए दंगों का मुख्य केन्द्र थाटीपुर, मुरार और गोला का मंदिर के साथ ही इंदरगंज थाना क्षेत्र था, और ये ही इलाके संवेदनशील थे और यहां पर किसी प्रकार का तनाव ना हो इसके लिए पुलिस जवान और अफसर मुख्य चौराहों पर तैनात रहे। क्षेत्र की सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक नहीं हो इसके लिए पुलिस अफसर लगातार राउण्ड लगाकर मॉनीटरिंग करते रहे।
उल्लेखनीय है कि 2 अप्रैल 2018 को ग्वालियर-चंबल अंचल में जातिगत हिंसा भडक़ी थी। इस हिंसा में ग्वालियर शहर में दो लोगों की मौत के साथ ही अंचल में 7 लोग मारे गए थे। करीब एक सैकड़ा एफआईआर दर्ज की गई थीं।
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