पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने अटल जी के साथ बिताए हुए पलों को किया साझा
Apr 02 2025
ग्वालियर। भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के जन्म शताब्दी समारोह के तहत भाजपा ग्वालियर महानगर की जिला एवं मंडल टोली के साथ उनकी स्मृतियों को ग्वालियर के पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने श्रद्धेय अटल के साथ बीते हुए ऐतिहासिक पलों को और उनकी यादों को साझा किया। इससे पूर्व वरिष्ठ नेता का अंगवस्त्र पहनाकर उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर अटल जी को याद करते हुए पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने बताया कि अटल जी के साथ संस्मरण में मैं इतना कहूंगा कि अटल जी का व्यक्तित्व जितना विराट दिखाई देता था एक राजनेता के रूप में वह प्रधानमंत्री भले ही बाद में बने हो लेकिन उनका औहदा बहुत बड़ा था। इतने बड़े औहदे वाले राजनेता के सामने मिलते समय शायद हम अपने मन की बात ना कर पाए कुछ दूरी बनी रहे लेकिन मेरी उनसे बार-बार मुलाकात होती थी, जब मैंने उनसे कहा कि मुझे आपसे मिलना है तो उनकी तरफ से कभी भी ना नहीं होती थी। ग्वालियर का होने के नाते उनका स्नेह हमेशा परिवार की तरह मेरे ऊपर रहता था। उन्होंने बताया कि 1996 में जब हिजमुल मुजाहिदउद्दीन नामक आतंकी संगठन ने धमकी दी कि अमरनाथ की यात्रा हिंदुस्तान में नहीं होने देंगे। उस समय में बजरंग दल का प्रमुख था। तब मैंने संगठन से अनुमति ली और 50000 युवाओं को लेकर घाटी में आ रहा हूं देखता हूं कौन मायका लाल मुझे रोकेगा, रोक कर दिखाएं उसके बाद यात्रा हुई और प्रकृति नियम से कुछ श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई तब क्या हुआ कि दिल्ली के ताल कटोरा में श्रद्धालुओं को श्रद्धांजलि सभा होनी चाहिए और आतंकियों के कुकृत्य पर कुछ बोला जाए। उस सभा में श्रद्धेय अटल को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया और मुझे हिंदू संगठन के वक्ता के रूप में अटल जी के पास ही बैठा दिया गया। तब मेरा भाषण हुआ और मैंने धीरे से अटल जी से पूछा कि मुझे कितने नंबर दिए तब उन्होंने कहा कि 100 में से 95 तो मैंने उनसे पूछा की पांच नंबर किस चीज के काट लिए उन्होंने धीरे से मेरे कान में कहा कि आप कुछ ज्यादा ही गरम-गरम बोलते है तो मैंने उनसे धीरे से कहा कि आप बड़े राजनेता है और मुझे हिंदू युवाओं के नुमाइंदे के नाते देश में बोलना होता है। तो आप जैसा हम कहां बोल पाएंगे तो उन्होंने कहा कि चल ठीक है 100 दिए और बड़ी जोर से हंस दिए।
उन्होंने बताया कि 1997 के आखिरी की बात है जब मैं अटल जी से मिलने पहुंचा तो कार्यालय में अनौपचारिक तरीके से बैठे हुए थे। मेने उनके चरण छुए और और उनको नमस्कार किया तो वे बोले आइए राष्ट्रीय अध्यक्ष, तो मैंने उनसे कहा कि मैं अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं रहा। मैं तो अब आपके घर आ गया हूं तो उन्होंने कहा कि आप घर आ गए हैं तो हम भी आपकी धमाकेदार एंट्री के लिए तैयार बैठे हैं। तो उन्होंने मुझसे कहा कि भगवन आपको लोकसभा लडऩी है तो मैं चुप हो गया तो उन्होंने मुझसे सवाल किया कि कहां से लड़ोगे। तो मैंने उनसे कहा आपने और पार्टी ने जो सोचा है या फिर आपका जो भी आदेश होगा, तो उन्होंने कहा कि आप ग्वालियर का बीड़ा उठाईए वहां अपना परचम फहराइये तो मैंने कहा जो आपका आदेश। उसके बाद ग्वालियर से लोकसभा चुनाव में मुझे उतार दिया गया।
इस अवसर पर मंत्री धर्मेंद्र सिंह कुशवाह, अजय महेंदु, त्रिलोक शर्मा, नवीन चौधरी, अरविंद रघुवंशी, मंडल अध्यक्ष, जबर सिंह, रेशू राजावत सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।