संपत्ति से बिल और संस्कारों से बनती है गुडबिल: राघव
Mar 29 2025
ग्वालियर। कई जन्मों के पुण्यफल से मनुष्य जन्म मिलता है। इसे सिर्फ मोह माया में नष्ट न करें। जीवन उसी का धन्य होता है, जो मनमाना आचरण न करके संयमित जीवन शैली अपनाते हुए भक्ति करता है। यह विचार माधव मंगलम गार्डन में ऋषि सेवा समिति द्वारा आयोजित हो रही श्रीमद्भागत कथा के विश्राम दिवस पर राघव ऋषि ने व्यक्त किए। ग्वालियर में अगले वर्ष कथा के यजमान प्रेमलता आनंद मोहन अग्रवाल होंगे। कथा विश्राम के बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।
उन्होंने कहा कि आज समूचा विश्व जब भारतीय संस्कृति का दीवाना हो रहा है और हम पाश्चात्य की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने बताया कि जीवन में पांच ऋण होता हैं। देवऋण, पितऋण, ऋषि ऋण, भूत ऋण और मानव ऋण। देव ऋण की मुक्ति के लिए यज्ञ, पितृ ऋण की मुक्ति के लिए श्राद्ध, करना चाहिए। भूत ऋण से मुक्ति के लिए जीव जंतु और पक्षियों को दाना पानी देना चाहिए। अतिथि सत्कार से मानव ऋण से मुिक्त मिल जाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सिर्फ संपत्ति न दें बल्कि संस्कार भी दें। संपत्ति से बिल और संस्कारों से गुडबिल बनती है। माता-पिता उसे ही अपनी संपत्ति दें, जो विपत्ति में काम आएं।
कथा विश्राम पर पोथीपूजन एवं व्यासपूजन मुख्य यजमान मधु विनोद गोयल ने किया। संयोजक रामबाबू अग्रवाल द्वारा आयोजन को भव्य बनाने हेतु समस्त सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। आरती में आनन्द मोहन अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, प्रमोद गर्ग, संजय शर्मा, अम्बरीष गुप्ता, उमेश उप्पल, देवेंद्र तिवारी, हरिओम मिश्रा, अनिल पुनियानी, रामसिंह तोमर आदि मौजूद रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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