जो रामप्रेमी नहीं, वो राष्ट्रप्रेमी नहीं:राघव

Mar 25 2025

ग्वालियर। जो श्रीराम से प्रेम कर उनके आदर्शों को अनुशरण करता है, वहीं राष्ट्रप्रेमी हो सकता है, क्योंकि राम ने अपने राष्ट्र के लिए राजपाठ त्याग वन का वरण किया। रामायण भगवान राम का और श्रीमद्भागत श्रीकृष्ण का साक्षात् रूप है। रामायण का पाठ से मन का दर्शन हो जाता है। यह विचार राघव ऋषि महाराज ने मंगलवार को माधव मंगलम गार्डन मेें ऋषि सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन व्यक्त किए।
  इस मौके पर गोवर्धन लीला की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा ये इन्द्रियों के दमन की लीला है। गौ का अर्थ है भक्ति। भक्ति को बढ़ाने वाली लीला ही गोवर्धन लीला है। इस दौरान भक्तों ने गोवर्धन के दर्शन किए और उन्हें 56 भोग लगाए। राघव ऋषि ने कहा कि मैत्री जब से भगवान से नहीं होगी, तब तक जीवन में आनंद नहीं होगा। सुग्रीव अपने भाई के अत्याचार से दुखी था,लेकिन जैसे ही उसकी मित्रता श्रीराम से हुई उसका जीवन पुन: आनंदमयी हो गया। भगवान की कृपा उसी को मिलती है जो उसे पाने के लिए कदम बढ़ाते हैं। धन संपत्ति जीवन का लक्ष्य नहीं। भगवान को प्राप्ति ही जीवन का लक्ष्य है।
 राघव ऋषि ने बताया कि घर कितना ही छोटा है, उसमें पूजा का स्थान बाथरूम क ेपास एवं रसोई घर में नहीं होना चाहिए। यदि रसोई घर में पूजाघर बनाना भी पड़े तो एक पानी का घड़ा भरकर रख देने से वास्तुदोष समाप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि मंगल संतान को आज्ञाकारी बनाता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान विनोद गोयल, मधु गोयल द्वारा कथा झांकी पोथी एवं व्यासपीठ पूजन हुआ। आरती में अशोक जैन, आनन्द मोहन अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, प्रमोद गर्ग, संजय शर्मा, अम्बरीष गुप्ता, मनीष गोयल, उमेश उप्पल, अनिल पुनियानी, देवेंद्र तिवारी, हरिओम मिश्रा, रामसिंह तोमर, रामप्रसाद शाक्य, बद्रीप्रसाद गुप्ता प्रमुख रूप से मौजूद रहे।