श्रीराम के आदर्श के बिना श्रीकृष्ण प्राप्ति असम्भव:राघव ऋषि

Mar 25 2025

ग्वालियर। नदीगेट स्थित माधव मंगलम पैलेस में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिन राघव ऋषि ने कहा जीव प्रभु की भक्ति करता है तो उसे शक्ति मिलती है। राघव ऋषि ने कहा जीव यदि पूरी निष्ठा से प्रभु भक्ति करता है तो वह बलि बनता है एवं उस पर कृपा करने के लिए भगवान स्वयं वामन के रूप में पधारते हैं। परमात्मा जब द्वार पर पधारते हैं तो तीन कदम पृथ्वी अर्थात् तन, मन, धन जीव से मांगते हैं।तन से सेवा, मन से सुमिरन व धन से सेवा जो बलि की भांति करता है भगवान उसके द्वारपाल बनते हैं और वही अक्षुण्ण साम्राज्य को प्राप्त करता है। सत्व, रज, तमस इन तीनों गुणों को भगवान को अर्पण करो। शरीर से भगवान की सेवा करने से तमोंगुण, धन से रजोगुण, और मन से समर्पण व सम्बन्ध जुड़ता है।
कृष्ण चरित्र की चर्चा करते हुए राघव ऋषि ने कहा कि मन यदि सांसारिक चीज़ों का चिंतन छोड़ दे तो वह प्रभु में लीन हो सकता है। कृष्ण कथा मन को खींचती है इस कथा से ज्ञान, वैराग्य, भक्ति बढ़ती है।भागवत की कथा वक्ता और श्रोता दोनो को प्रेम रस में डुबा देती है। सांसारिक विषयों को भूलने से सच्चा आनन्द प्राप्त होता है। कृष्ण कथा संसार व देह भान को भी भुला देती है।