स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
Sep 07 2022
ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के संयुक्त तत्वावधान में विवि के गालव सभागार में बुधवार को स्वतंत्रता संग्राम में जनजाति नायकों के योगदान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गयाइस अवसर पर हरियाणा के पूर्व राज्यपाल प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।अध्यक्षता विवि के कुलपति प्रो.अविनाश तिवारी ने की।मुख्य वक्ता के रूप में लेखक,विचारक व सामाजिक कार्यकर्ता मोहन नारायण एवं वक्ता के रूप में सहायक निदेशक अनुसूचित जनजाति आयोग सुश्री मीनाक्षी शर्मा उपस्थित रहीं। सभी अतिथियों ने मंच पर पहुंचने के पश्चात द्वीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।तत्पश्चात सरस्वती वंदना का गायन किया गयाकार्यक्रम में अतिथियों का शॉल श्रीफल से सम्मान किया गयाराष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का परिचय वीडियो के माध्यम से कराया गयाआजादी के अमृत महोत्सव के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा देशभर के 125 विश्वविद्यालय के साथ मिलकर स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। है। इस श्रृंखला के तहत 07 सितंबर को जीवाजी विवि के गालव सभागार में हुए कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर आमंत्रित लेखक, विचारक मोहन नारायण ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जनजातीय योद्धाओं का उल्लेख कियाउन्होंने कहा कि जनजातीय समाज से आने वाले हमारे नायकों के बारे में इतिहास में न्याय नहीं किया गया है। सिद्धू कान्हू, बुद्धु भगत, शंकर शाह, तिलका मांझी जैसे वीरों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन इतिहास में जिस तरह से उसका वर्णन किया जाना चाहिए था वैसा नहीं किया गया। अंग्रेजों ने साजिश के तहत जनजाति समाज की गौरवशाली परंपरा को झुठलाकर उन्हें अपराधिक जनजाति घोषित कर दिया। दरअसल ऐसा इसलिए था क्योंकि जनजाति समाज ने कभी उनकी गुलामी को स्वीकार नहीं किया। विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रमों को करने का उदे्श्य भी यही है कि ताकि समाज को स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान का पता चल सकेमुख्य अतिथि प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि देश को आजाद हुए 75 वर्ष हो गए है,75 वर्ष बाद भी हम भारत को नहीं जान पाए भारत कैसा था।भारत कैसे विश्व का मार्गदर्शन करता था।जनजातीय के बारे में भ्रामक जानकारी फैलायी गई।योजनाबद्ध तरीके से अंग्रेजो ने कहा कि भारत एक धर्मशाला है यहां का मूलनिवासी वह है जो जंगलों में है जो पेड़, पशु,पक्षी, पहाड़ों की पूजा करता है। उन्होंने कहा कि जंगल में रहने वाले लोगों को मुख्य धारा में लाना चाहिएवक्ता सुश्री मीनाक्षी शर्मा ने अनुसुचित जनजातीय आयोग के बारे में बताया।उन्होंने कहा कि आयोग का मूल कार्य अनुसूचित जनजाति के लिए किसी भी कानून में जो भी अधिकार दिए है उनका अनुपालन कराना है। यदि उनका उलंघन होता है तो शिकायतकर्ता द्वारा प्राप्त शिकायत को दूर करने का कार्य किया जाता है।उनकी शोषण से रक्षा की जाती हैकार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.अविनाश तिवारी ने कहा कि जितनी समझ पर्यावरण के बारे मे अनुसूचित जनजाति को होती है उतनी आम नागरिक को नहीं होती है।यह पर्यावरण को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।यह प्राकृतिक संपदा जल,जंगल का संरक्षण करते है।औषधियों का ज्ञान इन्हें अधिक होता है।इनके अंदर जागरूकता लाने की जरूरत है।इनको मुख्य धारा से जोड़ना आवश्यक हैइस अवसर पर विवि के कुलपति प्रो.अविनाश तिवारी, कुलसचिव अरूण चौहान, प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी, मोहन नारायण, सुश्री मीनाक्षी शर्मा, प्रो.एसके द्विवेदी, डॉ.हरेंद्र शर्मा,अजाक्स के जिलाध्यक्ष चौधरी मुकेश मौर्य, विवेक शर्मा सहित छात्र छात्राएं उपस्थित रहेकार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान गाया गयाकार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रो.एसके द्विवेदी ने व्यक्त किया
संपादक
Rajesh Jaiswal
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